पिछले 10 सालों में यूरिया का उत्पादन 35% बढ़ा, डीएपी और एनपीके में 44% की वृद्धि
यूरिया, डीएपी और एनपीके की बढ़ी हुई सप्लाई से किसानों को मिलेगी राहत...

यूरिया का उत्पादन: भारत में किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उर्वरक विभाग (DOF) हर फसल सीजन से पहले राज्यों की जरूरतों का आकलन करता है और उसी आधार पर आपूर्ति की योजना बनाता है। इस व्यवस्था से देशभर में खाद की कमी न हो और किसान बिना रुकावट खेती कर सकें, यह सुनिश्चित किया जाता है।
10 सालों में उर्वरक उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी
पिछले एक दशक में भारत ने घरेलू उर्वरक उत्पादन में काफी प्रगति की है।
यूरिया उत्पादन : 2013-14 में 227.15 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 306.67 लाख मीट्रिक टन हो गया। यानी लगभग 35% की वृद्धि।
डीएपी और एनपीके : 110.09 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 158.78 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। यानी 44% की बढ़त।
यह आंकड़े साफ बताते हैं कि भारत अब खाद उत्पादन में आत्मनिर्भरता (self-reliance) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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वैश्विक चुनौतियों के बीच भी उर्वरकों की रिकॉर्ड आपूर्ति
अंतरराष्ट्रीय हालात ने उर्वरकों की सप्लाई को प्रभावित किया है:
लाल सागर संकट की वजह से जहाजों को लंबा रास्ता तय करना पड़ा, जिससे समय और लागत बढ़ी।
रूस-यूक्रेन युद्ध और इजराइल-ईरान तनाव ने भी खाद की अंतरराष्ट्रीय कीमतों को बढ़ा दिया।
इसके बावजूद, भारत सरकार ने कूटनीतिक प्रयासों और लॉजिस्टिक प्रबंधन से यह सुनिश्चित किया कि किसानों को कमी का सामना न करना पड़े।
भारत और मोरक्को के बीच 25 लाख मीट्रिक टन डीएपी और टीएसपी आपूर्ति का समझौता।
जुलाई 2025 में भारत और सऊदी अरब के बीच समझौता, जिसके तहत अगले 5 साल तक हर साल 31 लाख मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध कराया जाएगा।
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खरीफ 2025 : खाद की स्थिति संतोषजनक
सरकारी प्रयासों से खरीफ सीजन 2025 में उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है:
यूरिया : आवश्यकता 143 लाख मीट्रिक टन, उपलब्धता 183 लाख मीट्रिक टन, बिक्री 155 लाख मीट्रिक टन।
डीएपी : आवश्यकता 45 लाख मीट्रिक टन, उपलब्धता 49 लाख मीट्रिक टन, बिक्री 33 लाख मीट्रिक टन।
एनपीके : आवश्यकता 58 लाख मीट्रिक टन, उपलब्धता 97 लाख मीट्रिक टन, बिक्री 64.5 लाख मीट्रिक टन।
सरकार के प्रयासों से आज किसान न सिर्फ समय पर उर्वरक पा रहे हैं बल्कि देश खाद्य सुरक्षा की दिशा में भी मजबूत हुआ है। घरेलू उत्पादन बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग करने और लॉजिस्टिक सुधारों के चलते खरीफ 2025 में उर्वरकों की स्थिति पूरी तरह संतोषजनक है।
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