गन्ने की फसल में पीलापन? किसान तुरंत करें ये उपाय, नहीं तो हो सकता है भारी नुकसान
गन्ना किसानों के लिए जरूरी जानकारी: उकठा रोग और जड़ बेधक कीट से ऐसे करें बचाव

गन्ने की फसल में पीलापन आना एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है, जिससे किसान काफी परेशान हैं। यह लक्षण गन्ने की फसल में उकठा रोग या जड़ बेधक कीट के हमले का संकेत हो सकता है, जो समय पर नियंत्रण न होने पर फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर ने किसानों को इससे निपटने के लिए जरूरी सलाह और नियंत्रण के उपाय साझा किए हैं। अगर आप गन्ने की खेती करते हैं तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है ताकि आप समय रहते फसल को बचा सकें और उपज में कमी न हो।
गन्ने की फसल में पीलापन – क्यों हो रही है ये समस्या?
हाल ही में गन्ना किसानों को अपनी फसल की पत्तियों में पीलापन देखने को मिल रहा है। यह आम समस्या नहीं है, बल्कि फसल को नुकसान पहुंचाने वाले गंभीर रोग और कीटों का संकेत हो सकता है। यह स्थिति उकठा रोग (Wilt) या जड़ बेधक कीट (Root Borer) के कारण हो सकती है। अगर समय पर इसका इलाज नहीं किया गया, तो पैदावार में 50% तक की गिरावट हो सकती है।
उकठा रोग क्या है और यह कैसे फैलता है?
उकठा एक मृदा जनित फफूंद रोग है, जो Fusarium sacchari नामक फफूंद के कारण होता है। यह गन्ने की जड़ों और तनों को प्रभावित करता है जिससे पौधों का पोषण रुक जाता है और पौधे सूखने लगते हैं।
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उकठा रोग के लक्षण:
पत्तियों में पीलापन और बदरंग होना
पत्तियों का ऊपर से झुलस जाना
तनों को चीरने पर गुलाबी/लाल धारियां दिखना
तनों में नाव जैसी कैविटी बनना
पौधों का सिकुड़ जाना और मध्य शिराओं का पीला होना
उकठा रोग का नियंत्रण कैसे करें?
दवा का छिड़काव (Drenching):
थायोफेनेट मिथाइल 70 WP – 1.3 ग्राम/लीटर पानी
कार्बेंडाजिम 50 WP – 2 ग्राम/लीटर पानी
प्रति एकड़ 400 लीटर पानी में मिलाकर जड़ों के पास दो बार ड्रेंचिंग करें।
हर ड्रेंचिंग के बाद हल्की सिंचाई जरूर करें।
ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग न करें, यह मिट्टी के लाभदायक सूक्ष्मजीवों को नुकसान पहुंचाता है।
गन्ने में जड़ बेधक कीट – बड़ा खतरा
Root Borer (जड़ बेधक) कीट अप्रैल से अक्टूबर तक ज्यादा सक्रिय रहता है। इसका लार्वा गन्ने की जड़ों को खाकर फसल को कमजोर कर देता है।
लक्षण:
पत्तियों का मुरझाना और पीला पड़ना
पौधों की वृद्धि रुक जाना
जड़ों में सफेद बिना धारियों की सुंडी दिखाई देना
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जड़ बेधक कीट नियंत्रण उपाय
रसायनिक नियंत्रण:
फिप्रोनिल 0.3G – 8–10 किलोग्राम प्रति एकड़ छिड़कें
वैकल्पिक दवाएं (750 लीटर पानी में मिलाकर ड्रेंच करें):
क्लोरोपायरीफॉस 20% EC – 2 लीटर प्रति एकड़
क्लोरोपायरीफॉस 50% EC – 1 लीटर प्रति एकड़
इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL – 200 मिली प्रति एकड़
जैविक उर्वरकों से रोगों से बचाव
गन्ना शोध परिषद किसानों को जैविक खाद और जीवाणु उर्वरकों (Bio-fertilizers) के प्रयोग की सलाह देता है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है और फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
जरूरी सावधानी
किसी भी कीटनाशक का प्रयोग करने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या कृषि विभाग से सलाह लें।
मिट्टी की जांच कर ही उर्वरकों का इस्तेमाल करें।
नियमित रूप से फसल की निगरानी करें ताकि समस्या शुरुआती अवस्था में ही पकड़ में आ जाए।
अगर आप गन्ने की खेती करते हैं और आपकी फसल में पत्तियों का रंग पीला हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह उकठा रोग या जड़ बेधक कीट का संकेत हो सकता है।
समय पर उपाय करने से आपकी फसल की रक्षा हो सकती है और उत्पादन में कोई कमी नहीं आएगी।
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