अब धान की खेती में डबल मुनाफा, जानिए कैसे एक ही खेत में दो बार रोपाई करके किसान बढ़ा रहे हैं उत्पादन?

धान की खेती में नया प्रयोग – एक ही खेत में दो बार रोपाई करके किसान 25% तक बढ़ा रहे हैं उत्पादन।

उत्तर प्रदेश और बिहार के कई किसान अब एक नई तकनीक से धान की खेती Paddy cultivation में डबल फायदा उठा रहे हैं। इस तकनीक को डबल ट्रांसप्लांटिंग या संडा रोपाई कहा जाता है। इसके ज़रिए एक ही खेत में दो बार धान की रोपाई की जाती है, जिससे मेहनत और खर्च दोनों कम होते हैं, और पैदावार ज़्यादा मिलती है।

बदलते मौसम में यह तकनीक बन रही सहारा

बरसात के मौसम में कई बार खेतों में पानी भर जाता है या समय पर पानी नहीं मिलता, जिससे धान की रोपाई पर असर पड़ता है। ऐसे में डबल ट्रांसप्लांटिंग तकनीक किसानों को मौसम की मार से बचाते हुए बेहतर फसल लेने में मदद करती है।

डबल ट्रांसप्लांटिंग कैसे की जाती है?

  1. पहले 3 हफ्ते के पौधों को खेत में 20 सेमी लाइन और 10 सेमी पौधों की दूरी पर लगाया जाता है।

  2. फिर 3 हफ्ते बाद उसी खेत में दोबारा रोपाई की जाती है — इस बार दूरी और कम (10 सेमी) रखी जाती है।

  3. दूसरी बार रोपाई के लिए उन्हीं पौधों से निकले मजबूत साइड शूट (कल्ले) का उपयोग किया जाता है।

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इस तकनीक से क्या फायदे हैं? Paddy cultivation

  • पौधों की संख्या बढ़ती है और खेत पूरी तरह उपयोग में आता है।

  • पौधे ज़्यादा मजबूत होते हैं और ज्यादा कल्ले निकलते हैं।

  • उत्पादन में 20–25% तक की बढ़ोतरी होती है।

  • खेत में नमी की स्थिति को अच्छे से संभाल सकते हैं।

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ध्यान देने वाली बातें:

  • दूसरी रोपाई पुराने पौधों से न करें, नहीं तो उपज घट सकती है।

  • पहली और दूसरी रोपाई के बीच 3 हफ्तों का अंतर ज़रूरी है।

  • रोपाई की दूरी वैज्ञानिक तरीके से रखें।

  • खेत में जल निकासी की सही व्यवस्था होनी चाहिए।


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