Mustard Farming Tips: सरसों किसानों के लिए जरूरी सलाह: सही खाद और तरीके अपनाएं

सही खाद, सिंचाई और प्रबंधन से सरसों की पैदावार बढ़ाना अब आसान, किसान इस गाइड को फॉलो करके 6–7 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन ले सकते हैं।

Mustard Farming Tips: सर्दियों में सरसों की बुवाई तेजी से की जा रही है और अगर किसान सही तरीके अपनाएं तो वे एक एकड़ में 6–7 क्विंटल तक उत्पादन आसानी से ले सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है।

सरसों की बुवाई का सबसे सही समय

अक्टूबर से दिसंबर का समय सरसों की खेती के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
इस समय तापमान और मौसम की स्थिति बीज अंकुरण और पौधों की तेजी से बढ़त के लिए उपयुक्त होती है।

देर से बुवाई करने पर भी उत्पादन अच्छा मिल सकता है, अगर सही खेती पद्धति अपनाई जाए।

खाद का सही अनुपात- यही बनेगा उपज का आधार

अच्छी उपज के लिए मिट्टी तैयार करने के साथ खाद देना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

एक एकड़ खेत में किसानों को यह मात्रा देनी चाहिए:

खाद का प्रकारमात्रा (प्रति एकड़)
नाइट्रोजन (N)20 किलो
फास्फोरस (P)16 किलो
पोटाश (K)10 किलो
सल्फर8 किलो

सल्फर बेहद जरूरी है, क्योंकि यह दानों की गुणवत्ता सुधारता है और तेल की मात्रा बढ़ाता है।

सिंचाई और निराई-गुड़ाई पर दें ध्यान Mustard Farming Tips

  • पहली सिंचाई बीज अंकुरण के 20–25 दिन बाद करें।
  • दूसरी सिंचाई फूल आने पर जरूरी होती है।
  • समय पर खरपतवार नियंत्रण करने से पौधे स्वस्थ और उत्पादन अधिक मिलता है।

यह भी पढ़ें- सरसों की फसल पर बढ़ रहा है इस कीट का खतरा, किसान अपनाएं ये उपाय

बीज की मात्रा, कितना बीज चाहिए?

  • सरसों की खेती के लिए बीज की मात्रा ज्यादा नहीं लगती।
  • एक एकड़ खेत के लिए सिर्फ 2 किलो बीज पर्याप्त होता है।
  • धनबाद जिले के लिए BBM-1 किस्म सबसे उपयुक्त मानी जाती है क्योंकि यह कम तापमान में भी अच्छी तरह विकसित होती है।

जिले में सरसों उत्पादन को बढ़ावा

धनबाद जिले में इस वर्ष 220 हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की खेती का लक्ष्य तय किया गया है।
इस बार किसानों में उत्साह बढ़ा है और 10 ब्लॉकों में 500 से अधिक किसानों को बीज भी वितरित किए गए हैं।

क्यों बढ़ रही सरसों की मांग?

सरसों सिर्फ तेल के लिए ही नहीं, बल्कि पशु चारा (खली), खाद्य उद्योग और दवाइयों में भी उपयोग होती है।
इसलिए इसका बाजार मूल्य स्थिर और लाभदायक रहता है।

सरकार का तिलहन पर फोकस

राज्य और केंद्र दोनों सरकारें तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर काम कर रही हैं।
किसानों को उन्नत बीज, सब्सिडी और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।

यह भी पढ़ें- सरसों की खेती की समस्या? किसान अपनाएं ये 5 उपाय, होगा बंपर उत्पादन

अगर किसान सही समय पर बुवाई, खाद प्रबंधन, सिंचाई और निराई की तकनीक अपनाएं तो सरसों की 6–7 क्विंटल प्रति एकड़ तक उपज लेना बिल्कुल संभव है।
यह फसल कम लागत में अधिक लाभ देने वाली है और किसानों की आय बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।


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