मुर्गी और मछली पालन के लिए सहकारी समितियों से मिलेगा आर्थिक सहयोग
सरकार देगी 2000 करोड़ का लोन, मछली और मुर्गी पालन करने वाले किसानों को मिलेगा सहकारी समितियों से आर्थिक फायदा, जानें पूरी योजना।

देश के मुर्गी और मछली पालन करने वाले किसानों के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर आई है। केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) को 2,000 करोड़ रुपये का लोन देने की मंजूरी दी है। इस लोन का फायदा सीधे देशभर की 13,000 से ज्यादा सहकारी समितियों और उनके करीब 3 करोड़ किसान सदस्यों को मिलेगा।
किसानों को मजबूत बनाएगा केंद्र का यह फैसला
सरकार का यह फैसला खासतौर से पोल्ट्री (मुर्गी पालन) और फिशरीज (मछली पालन) जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है। एनसीडीसी को मिलने वाला यह लोन 4 साल की अवधि के लिए होगा और हर साल 500 करोड़ रुपये की राशि बतौर डिस्बर्समेंट दी जाएगी। इससे सहकारी समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जाएगा, ताकि वे अपने सदस्यों को मछली और मुर्गी पालन के क्षेत्र में संसाधन और तकनीकी सहायता दे सकें।
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छोटे मछली पालकों को मिलेगा बड़ा फायदा
अब तक मछली पालन के लाभ बड़े व्यवसायिक समूहों तक ही सीमित रहते थे, लेकिन अब सरकार की इस योजना से छोटे स्तर के मछली पालकों को भी आधुनिक ट्रॉलर्स (मछली पकड़ने वाली नावें) और अन्य तकनीकें मिलेंगी। कोचिन शिपयार्ड में ऐसे ट्रॉलर्स बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे छोटे किसान भी सीधे बड़े स्तर पर मछली उत्पादन कर पाएंगे।
एनसीडीसी मॉडल को मिला विस्तार
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि एनसीडीसी का यह मॉडल किसानों को आर्थिक सहायता पहुंचाने का एक सफल तरीका बन चुका है। अब इस मॉडल को और विस्तार देने के लिए सरकार ने 2,000 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इससे न सिर्फ पोल्ट्री और फिशरीज सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि कई और क्षेत्रों में भी सहकारी समितियां सशक्त होंगी।
किन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा?
इस लोन की मदद से सहकारिता क्षेत्र के कई सेक्टरों को भी लाभ मिलेगा, जैसे:
डेयरी (दुग्ध उत्पाद)
पशुपालन
मछली पालन
चीनी उद्योग
कपड़ा उद्योग
फूड प्रोसेसिंग
भंडारण और शीत भंडारण
महिला नेतृत्व वाली सहकारी समितियां
श्रमिक सहकारी समितियां
इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और किसानों की आमदनी बढ़ेगी।
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सरकार का यह कदम सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा। जो किसान अब तक संसाधनों की कमी के कारण पिछड़ जाते थे, उन्हें अब सीधे वित्तीय, तकनीकी और उत्पादन क्षमता का लाभ मिलेगा। खासतौर पर छोटे किसान, महिलाएं और सीमांत परिवार इस योजना से सशक्त बनेंगे।
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