किसानों को अब मिलेंगे हाई क्वालिटी आलू के बीज, पैदावार में आएगा बड़ा बदलाव
सरकार की नई योजना से किसानों को फायदा

अब देश के किसानों को खेती के लिए हाई क्वालिटी आलू के बीज मिलेंगे। इससे फसल की पैदावार बढ़ेगी और आमदनी में भी इजाफा होगा। हरियाणा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (International Potato Center – CIP) के साथ एक अहम समझौता किया है, जिसका मकसद किसानों को रोगमुक्त और जलवायु के अनुसार उपयुक्त बीज उपलब्ध कराना है।
इससे खासतौर पर उन किसानों को फायदा होगा, जो अब तक सीमित संसाधनों के कारण अच्छी फसल नहीं ले पाते थे।हरियाणा सरकार और अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के समझौते से किसानों को मिलेगा रोगमुक्त और जलवायु के अनुकूल आलू बीज, जिससे पैदावार में होगी बंपर बढ़ोतरी।
हरियाणा सरकार और CIP के बीच समझौता
हरियाणा के बागवानी विभाग और अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के बीच हुए इस एमओयू के तहत आलू बीज का उत्पादन किया जाएगा। यह बीज रोगमुक्त, उच्च गुणवत्ता वाला और स्थानीय मौसम के अनुसार होगा। इससे किसानों को बाहर से बीज मंगवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उत्पादन भी बेहतर होगा।
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राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से मिल रही है मदद
यह परियोजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत चलाई जा रही है, जिसके लिए केंद्र सरकार ने पहले ही 4.48 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। चार साल की इस योजना पर कुल 18.70 करोड़ रुपये खर्च होंगे। योजना के तहत करनाल जिले के शामगढ़ स्थित पोटैटो टेक्नोलॉजी सेंटर (PTC) में आधुनिक तकनीकों की मदद से बीज तैयार किया जाएगा।
दक्षिण हरियाणा के किसानों को विशेष लाभ
शुरुआत में इस योजना का लाभ हरियाणा के दक्षिणी जिलों जैसे दादरी, भिवानी, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी के किसानों को मिलेगा। अब उन्हें अच्छी क्वालिटी का बीज अपने ही राज्य में मिल जाएगा, जिससे लागत भी घटेगी और उपज भी बढ़ेगी।
दूसरे राज्यों तक होगी आलू बीज की सप्लाई ….हाई क्वालिटी आलू के बीज
यह बीज सिर्फ हरियाणा ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों के किसानों तक भी पहुंचेगा। इस तरह हरियाणा आलू बीज उत्पादन का बड़ा केंद्र बन सकता है।
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किसानों की आय बढ़ाने में मददगार
बेहतर बीज से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होगा, जिससे किसान अपनी फसल अच्छे दामों पर बेच पाएंगे। इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और जीवन स्तर बेहतर होगा।
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यह समझौता किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे खेती में तकनीकी सुधार आएगा और किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज समय पर मिल सकेंगे। सरकार की यह पहल कृषि में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम है।
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