बढ़ते तापमान से गेहूं और जौ की फसल को बचाने के उपाय
बढ़ते तापमान से गेहूं और जौ की फसल को नुकसान हो सकता है। किसान इन उपायों को अपनाकर अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं।

गेहूं और जौ की फसल: देश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे न सिर्फ लोग परेशान हो रहे हैं, बल्कि फसलें भी प्रभावित हो रही हैं। विशेष रूप से गेहूं और जौ की फसल को अधिक गर्मी से नुकसान हो सकता है। कई जगहों पर गेहूं की कटाई शुरू हो चुकी है, जबकि कुछ क्षेत्रों में देर से बोई गई फसल की कटाई बाकी है, ऐसे में किसानों को अपनी फसलों को गर्मी से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए।
गर्म मौसम का गेहूं पर प्रभाव
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, गेहूं के लिए परागण के समय अधिकतम तापमान 30°C से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि यह 35°C से ऊपर चला जाता है, तो फसल को नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है। कई स्थानों पर तापमान पहले ही 40°C के करीब पहुंच चुका है, जिससे गेहूं की गुणवत्ता खराब हो सकती है और किसानों को कम कीमत मिलने का खतरा रहता है।
अधिक तापमान से होने वाले नुकसान
गेहूं के दानों का सही से न बनना।
बालियों की संख्या में कमी आना।
दानों का आकार सिकुड़ जाना और वजन कम होना।
उपज की गुणवत्ता खराब होना, जिससे बाजार में कीमत कम मिलना।
मिट्टी में नमी की कमी के कारण अधिक सिंचाई की जरूरत पड़ना।
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गेहूं और जौ की फसल को बचाने के उपाय
हल्की सिंचाई करें – खेत में नमी बनाए रखने के लिए हल्की और बार-बार सिंचाई करें।
पोषक तत्वों का छिड़काव करें – देर से बोई गई फसल में पोटेशियम नाइट्रेट (13:0:45), चिलेटेड जिंक और चिलेटेड मैग्नीशियम का छिड़काव करें।
सीलिसिक अम्ल का उपयोग करें – गेहूं और जौ की फसल में दाना बनने के समय 15 ग्राम सीलिसिक अम्ल प्रति 100 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
म्यूरेट ऑफ पोटाश का छिड़काव – 0.2% म्यूरेट ऑफ पोटाश या पोटेशियम नाइट्रेट का 15 दिनों के अंतराल पर दो बार छिड़काव करें।
एस्कॉर्बिक अम्ल का छिड़काव करें – फसल में बाली आने पर 10 ग्राम एस्कॉर्बिक अम्ल को 100 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें, जिससे अधिक गर्मी से फसल को बचाया जा सके।
झुलसा रोग से बचाव करें – यदि गेहूं की फसल में झुलसा रोग फैलने लगे, तो प्रोपिकोनाजोल (1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी) का छिड़काव 10-12 दिनों के अंतराल पर दो बार करें।
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बढ़ते तापमान से गेहूं और जौ की फसल को गंभीर नुकसान हो सकता है। लेकिन किसान यदि समय पर उचित कृषि तकनीकों का पालन करें और सही पोषक तत्वों का छिड़काव करें, तो फसल को गर्मी से बचाया जा सकता है और उपज की गुणवत्ता को बनाए रखा जा सकता है।
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