सरकार का दावा – किसानों को समय पर मिलेगी खाद (Fertiliser), यूरिया और डीएपी की कोई कमी नहीं
धान और मक्का की बुवाई में किसानों को नहीं होगी खाद की परेशानी

भारत में खेती-किसानी के लिए खाद (Fertiliser) सबसे अहम इनपुट में से एक है। हर सीजन में किसान सबसे ज्यादा चिंता खाद की उपलब्धता को लेकर करते हैं। खासकर खरीफ सीजन में, जब धान और मक्का जैसी फसलें बड़े पैमाने पर बोई जाती हैं, तब यूरिया (Urea) और डीएपी (DAP) की मांग तेजी से बढ़ जाती है।
इस बार सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है और साफ कर दिया है कि यूरिया और डीएपी की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त भंडार तैयार कर लिया गया है और समय पर खाद किसानों तक पहुंचाई जा रही है।
खरीफ 2025 में यूरिया की उपलब्धता
खरीफ 2025 में यूरिया की जरूरत 14.3 मिलियन टन थी।
इसके मुकाबले सरकार ने 18.3 मिलियन टन यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित की।
अगस्त तक ही लगभग 15.5 मिलियन टन यूरिया किसानों तक पहुंच चुका है।
पिछले साल की तुलना में 1.3 मिलियन टन ज्यादा खपत हुई है, फिर भी सप्लाई में कोई बाधा नहीं आई।
इसका मतलब है कि किसानों को समय पर यूरिया मिल रहा है और उत्पादन में कोई दिक्कत नहीं होगी।
डीएपी और एनपीके की स्थिति
डीएपी (DAP)
मांग: 4.5 मिलियन टन
उपलब्धता: 4.9 मिलियन टन
अब तक किसानों तक पहुंचा: 3.3 मिलियन टन
एनपीके (NPK)
मांग: 5.8 मिलियन टन
उपलब्धता: 9.7 मिलियन टन
अब तक बेचा जा चुका: 6.45 मिलियन टन
सरकार ने भंडार इतना बढ़ा दिया है कि किसानों को किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भी मजबूत सप्लाई
अंतरराष्ट्रीय हालातों ने इस बार खाद की सप्लाई को चुनौती जरूर दी, लेकिन भारत ने राजनयिक स्तर पर मजबूत कदम उठाए।
रेड सी संकट की वजह से जहाजों को लंबा रास्ता (6500 किमी ज्यादा) तय करना पड़ा।
रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-ईरान संघर्ष से अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद की कीमतें बढ़ गईं।
इसके बावजूद भारत सरकार ने लंबी अवधि के करार (Long Term Agreements) और समझौतों से समय पर खाद पहुंचाना सुनिश्चित किया।
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अंतरराष्ट्रीय समझौते – किसानों के लिए बड़ा सहारा
भारतीय कंपनियों ने मोरक्को से 2.5 मिलियन टन डीएपी की आपूर्ति का समझौता किया है।
भारत और सऊदी अरब के बीच जुलाई 2025 में दीर्घकालिक समझौता (LTA) हुआ है। इसके तहत अगले 5 साल तक हर साल 3.1 मिलियन टन डीएपी भारत को मिलेगा।
इन कदमों से किसानों को लंबे समय तक खाद की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
किसानों को सीधा फायदा
इन सभी प्रयासों का सबसे बड़ा लाभ भारतीय किसानों को मिलेगा।
समय पर यूरिया और डीएपी उपलब्ध होगा।
बुवाई और उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
धान, मक्का जैसी खरीफ फसलों की पैदावार बढ़ेगी।
किसानों की लागत और मेहनत दोनों कम होंगी।
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सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत में यूरिया और डीएपी की कोई कमी नहीं है। बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों और घरेलू भंडारण व्यवस्था की वजह से किसानों को समय पर खाद मिलती रहेगी। आने वाले सीजन में भी उत्पादन सुरक्षित रहेगा और किसानों की चिंता काफी हद तक कम हो जाएगी।
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